बलिदान इसका अर्थ है अपने वैदिक कर्तव्यों और सामाजिक दायित्वों को पूरा करना, भले ही वे आनंद दायक न हों। जब भगवान की प्रसन्नता के लिए किया जाता है तो बलिदान को पूर्ण माना जाता है। दूसरे अर्थों में बलिदान किसी नेक सामाजिक कारण हेतु मृत्यु या हत्या को प्राप्त होना होता है। जैसे पृथ्वीराज चौहान, गुरु तेग बहादुर, बन्दा ...
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